माँ जैसा काम में हाथ बटाते मेरे पिता।
हर महीने अपनी कमाई मेरे हाथ में देते मेरे पिता।
कभी मुझे डाँटते, कभी मेरी डाँट खाते मेरे पिता।
निशूलाल, मेरा पुत्तर, मेरा कबूतर कहकर मुझे दुलारते मेरे पिता।
हर रोज मेरी राह तकते मेरे पिता।
मेरी बीमारी में अपनी बीमारी भूल जाते मेरे पिता।
दवाओं की दुकान लगा देते मेरे पिता।
कभी बङे तो कभी बच्चे बन जाते मेरे पिता।
एक साथ दो किरदार निभाते मेरे पिता।
माँ की कमी पूरा करते मेरे पिता।
अपर्णा
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