Monday, December 30, 2013

यादें

तेरी यादों  का  सागर है जो, मुझमे ही है पलता  जाता।

कभी झरनों  सा,  कभी झीलों सा,  बहता जाता।

कभी यूँ ही खामोश  रहता, कभी झर-झर  बहता जाता।

कभी होंठो पे मुस्काने लाता, कभी पलकों को भिगोता जाता।

तेरी मिलन कि बेला में और भी है, ये बढ़ता जाता।

कितना भी मै  नीर बहाऊँ, अनंत तक ये बढ़ता जाता।

तेरी यादों  का  सागर है जो, मुझमे ही है पलता  जाता।

-----------------अपर्णा--------------

Monday, December 16, 2013

माँ

जिस रोज़ माँ की  याद बहुत आती है।
उस रात वो मिलने मुझसे, सपने में जरुर आती है।
-------------अपर्णा -------------