Wednesday, July 31, 2013

नकाबपोश दोस्त

क्यूँ आते जाते लोगो को हम दोस्त कहें।
क्यूँ भरोसे की नींद में हम बेहोश रहें।
क्यूँ धोखे की दस्तक में हम खामोश रहें।
क्यूँ दोस्त के भेष में साथ नकाबपोश रहें।
क्यूँ ना हम अपनी आवाज़ सुने।
दूर करे उन लोगों को.
जो वक़्त आने पे मौन रहें।
मेरी चोट में जो नाख़ून रहें।
--------अपर्णा --------

Wednesday, July 24, 2013

सावन

दस्तक दी ये किस मौसम ने,
मासूमो की कश्तियाँ, हाथों से निकल पानी संग बह चली,
मेंहदी भी पत्थर में रंग अपना छोड़ हाथों में रचने लगी,
पेड़ों की डाली में पड़े झूलों  से सैर आसमान की होने लगी,
आ गया है सावन जमीं गुनगुनाने लगी।
अपर्णा।।



Wednesday, July 17, 2013

यादें1

यादें  शाम होते ही छुपे हुए कोनो  से निकलती हैं।
कमबख्त बहुत तेज़ काटती हैं, और सर पे ही मंडराती हैं।
मच्छरों की तरह।।
अपर्णा।।

Tuesday, July 16, 2013

यादें 2

सूरज में हो कितनी चमक, उससे नज़रें मिलाना है।
संग लायी हो कितनी भी धूल, उन हवाओं को देखना है।
लहरें हो कितनी भी तेज़, उनमे तैरना है।
बादलों की  बूंदों में हो कितना भी वेग, मुझे भीगना है।
हर याद में  हो कितना भी दर्द,
बस तेरी यादों में ही मुझे अब जीना है,
बस तेरी यादों में ही मुझे अब जीना है।
अपर्णा 'निशु'

Tuesday, July 9, 2013

बदलते रिश्ते

कुछ रिश्ते भी वक़्त के साथ निभाते हैं लोग।
जीते जी हो जरुरत जिनकी, वो मौत पे कन्धा देने आते हैं।।
अपर्णा।।

Friday, July 5, 2013

दिल का दरवाज़ा

बरसों से जो नहीं खुला, खोलो दरवाजा, भरा वो ज़ख्म फिर उभर आएगा।
आईने पे जमी धूल हटाओ, यादों का मंज़र साफ़ नज़र आएगा।
उढाई  जो सफ़ेद चादर हटाओ, टुटा वो ख्वाब नज़र आएगा।
अलमारी में रखा सामान उठाओ, सजा उसमे  साथ नज़र आएगा .
दीवार पे टंगी  तस्वीर उतारो, वो चेहरा अब भी प्यारा नज़र आएगा।
खैर छोड़ो, बंद ही रहने दो इस सूने  कमरे को, वरना वो जख्म नासूर बन जायेगा।
वक़्त के मरहम से ये जख्म भी भर जायेगा।
फेंक दो चाभी कहीं दूर, दिल के  घर को सजाओ, मुस्कुराओ, जीवन खुशनुमा हो जायेगा।।
अपर्णा 'निशु'