Saturday, August 31, 2013

बादल

बादलों ने ये कैसी अजब आक्रतिया बनाई,

सूरज ने जैसे ओढ़ी हो रजाई,

या मगर ने निगल, उसे हो अपनी भूख मिटाई,

चूहे बिल्ली में जैसे छिड़ी हो लड़ाई,

या घोड़ों ने हो दौड़ लगाईं,

चिड़िया जैसे हो पंख फड़ -फड़ाई ,

ऊन  निकलवाने जैसे भेड़  की भीड़ हो आई,

परी  ने जैसे छड़ी हो घुमाई,

भूत देख जैसे बच्ची हो चिल्लाई,

सोया बच्चा जैसे माँ ने हो लोरी सुनाई।।

-----अपर्णा----

Thursday, August 22, 2013

जमापूंजी

जमापूंजी वक़्त पर हमेशा काम आती है,
रुपयों की हो या रिश्तों की,
ब-शर्ते किश्तें समय पर भरी जाएँ.........
-------------अपर्णा--------------

Wednesday, August 14, 2013

उम्र

सन्नाटे के शोर में जब चलने लगती  है ज़िन्दगी।
उन बूढी आँखों में देखा, मौत पल-पल डसती है ज़िन्दगी।।
अपर्णा।।

Friday, August 2, 2013

बादल

बादलों ने मिलके ये कैसी अनोखी आकृतियाँ बनाई,
सूरज ने जैसे ओढ़ी हो रजाई,
या मगरमच्छ ने खाकर इसे हो अपनी भूख मिटाई,
चूहे बिल्ली में जैसे चिढ़ी हो लड़ाई,
मुर्गे ने जैसे बांग लगाईं,
हिरन देख जैसे शेरनी हो गुर्राई,
चिड़िया जैसे  हो पंख फड़-फडाई ,
ऊन निकलवाने जैसे भेड़ की भीड़ हो आई,
भूत देख जैसे कोई बच्ची चिल्लाई,
परी ने जैसे हो छड़ी घुमाई,
सोया बच्चा जैसे माँ ने हो लोरी सुनाई,
ना टिकेट न किराया, घर बैठे अजायबघर की सैर कराई।
----------अपर्णा--------