ग़म के बस्ते से,
तजुर्बे की किताब निकाल,
अश्क़ की स्याही कलम मे डाल,
पढ़-लिख कर,
ज़िन्दगी का इम्तेहान दिया,
दुनिया के मदरसे में हमने,
एक दर्ज़ा और पार किया।।
-----अपर्णा-------
तजुर्बे की किताब निकाल,
अश्क़ की स्याही कलम मे डाल,
पढ़-लिख कर,
ज़िन्दगी का इम्तेहान दिया,
दुनिया के मदरसे में हमने,
एक दर्ज़ा और पार किया।।
-----अपर्णा-------