Thursday, January 31, 2013


हर शाम आंसुओं का सैलाब होता है।
जंजीरों में जकड़ा हर एक ख्वाब होता है।
दुनिया के तमाम सवालों का ना कोई जवाब होता है।
झूठी शान-ओ-शौकत का रुआब होता है।
मासूम की ख्वाहिशो को छुपाता दुल्हन का  लिबाज़ होता है।
-------अपर्णा------

Wednesday, January 23, 2013

आँखों का दर्द कोई छुपाये तो कैसे???
खुले  तो चमकती हैं, मूंदो  तो बरसती हैं।
--------अपर्णा --------

Tuesday, January 1, 2013

कुछ ना बदला, ना इस बरस, ना उस बरस।
तेरे दरस को गयी हैं अँखियाँ तरस!!!
अपर्णा!!!