हर शाम आंसुओं का सैलाब होता है।
जंजीरों में जकड़ा हर एक ख्वाब होता है।
दुनिया के तमाम सवालों का ना कोई जवाब होता है।
झूठी शान-ओ-शौकत का रुआब होता है।
मासूम की ख्वाहिशो को छुपाता दुल्हन का लिबाज़ होता है।
-------अपर्णा------
Wednesday, January 23, 2013
आँखों का दर्द कोई छुपाये तो कैसे???
खुले तो चमकती हैं, मूंदो तो बरसती हैं।
--------अपर्णा --------