ना सात फेरों का बंधन,
ना नौ महीने में बनती धङकन,
ना सात जन्मों की कसम,
हाथ मिला, साथ मिला और जुङ गया बंधन।
एक पहलू येभी
Thursday, April 23, 2015
दोस्ती
मां
जी नही सकते तेरे बगैर,
जी रहे हैं फिर भी खैर,
तेरी बातों, यादों, एहसासों को समेटकर, प्यारी अम्मा।
अपर्णा
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