Wednesday, November 20, 2013

One line1

तुझे भूलने कि कोशिशें छोड़ दी हमने, के ये यादें कहीं तो ठहरें।।
अपर्णा 

शब्द


मेरे शब्द तुम,  सारांश तुम,

 ना हो बंधन, वो निबंध तुम,

लय में बनाया पद्यांश तुम,

पिरोकर सजाया जिन्हे, वो वर्णमाला तुम,

मेरे जीवन की  किताब तुम,

हस्ताक्षर कर, करो अनमोल तुम।

अपर्णा।।

Saturday, November 9, 2013

धूप छांव

ग़मो कि सर्द सीलन मिटा दो,
ग़र खुशियों की धूप खिले,
उन्हें सुखा दो.....
अपर्णा