Saturday, August 31, 2013

बादल

बादलों ने ये कैसी अजब आक्रतिया बनाई,

सूरज ने जैसे ओढ़ी हो रजाई,

या मगर ने निगल, उसे हो अपनी भूख मिटाई,

चूहे बिल्ली में जैसे छिड़ी हो लड़ाई,

या घोड़ों ने हो दौड़ लगाईं,

चिड़िया जैसे हो पंख फड़ -फड़ाई ,

ऊन  निकलवाने जैसे भेड़  की भीड़ हो आई,

परी  ने जैसे छड़ी हो घुमाई,

भूत देख जैसे बच्ची हो चिल्लाई,

सोया बच्चा जैसे माँ ने हो लोरी सुनाई।।

-----अपर्णा----

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