बादलों ने मिलके ये कैसी अनोखी आकृतियाँ बनाई,
सूरज ने जैसे ओढ़ी हो रजाई,
या मगरमच्छ ने खाकर इसे हो अपनी भूख मिटाई,
चूहे बिल्ली में जैसे चिढ़ी हो लड़ाई,
मुर्गे ने जैसे बांग लगाईं,
हिरन देख जैसे शेरनी हो गुर्राई,
चिड़िया जैसे हो पंख फड़-फडाई ,
ऊन निकलवाने जैसे भेड़ की भीड़ हो आई,
भूत देख जैसे कोई बच्ची चिल्लाई,
परी ने जैसे हो छड़ी घुमाई,
सोया बच्चा जैसे माँ ने हो लोरी सुनाई,
ना टिकेट न किराया, घर बैठे अजायबघर की सैर कराई।
----------अपर्णा--------
सूरज ने जैसे ओढ़ी हो रजाई,
या मगरमच्छ ने खाकर इसे हो अपनी भूख मिटाई,
चूहे बिल्ली में जैसे चिढ़ी हो लड़ाई,
मुर्गे ने जैसे बांग लगाईं,
हिरन देख जैसे शेरनी हो गुर्राई,
चिड़िया जैसे हो पंख फड़-फडाई ,
ऊन निकलवाने जैसे भेड़ की भीड़ हो आई,
भूत देख जैसे कोई बच्ची चिल्लाई,
परी ने जैसे हो छड़ी घुमाई,
सोया बच्चा जैसे माँ ने हो लोरी सुनाई,
ना टिकेट न किराया, घर बैठे अजायबघर की सैर कराई।
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