क्यूँ आते जाते लोगो को हम दोस्त कहें।
क्यूँ भरोसे की नींद में हम बेहोश रहें।
क्यूँ धोखे की दस्तक में हम खामोश रहें।
क्यूँ दोस्त के भेष में साथ नकाबपोश रहें।
क्यूँ ना हम अपनी आवाज़ सुने।
दूर करे उन लोगों को.
जो वक़्त आने पे मौन रहें।
मेरी चोट में जो नाख़ून रहें।
--------अपर्णा --------
क्यूँ भरोसे की नींद में हम बेहोश रहें।
क्यूँ धोखे की दस्तक में हम खामोश रहें।
क्यूँ दोस्त के भेष में साथ नकाबपोश रहें।
क्यूँ ना हम अपनी आवाज़ सुने।
दूर करे उन लोगों को.
जो वक़्त आने पे मौन रहें।
मेरी चोट में जो नाख़ून रहें।
--------अपर्णा --------
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