एहसास. ..... उमङते- घुमङते, डूबते- तैरते, गोते लगाते, छितरे- बिखरे, दबे- कुचले, रंगीन- उदासीन, समेटकर सारे, चल पङे हैं हम, और चलेंगे निरंतर, अंतिम साँस तक, तुम हो इन्ही एहसासों में, और चलोगे साथ निरंतर, अंतिम साँस तक। अपर्णा
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