मायूसियत इतनी भी ना दे ऐ खुदा,
मैं खामोश हो गई, मेरी कलम भी खामोश ना हो जाए कहीं।
रफ्तार मेरे कदमों की तू रखना बरकरार,
हारकर बैठना ना सिखाना, लङने का हौसला देना यूँ ही।
वक्त की पाबंदियों से रखना परे मुझे,
बहुत दूर जाना है, लौटकर आना नही।
मशरूफ रहूँ ताउम्र मैं, थमने का खौफ ना आए कभी।
अपर्णा
No comments:
Post a Comment