वक्त आगे बढ़ता पल- पल,
तारीखें, घङी की सुईयों की तरह,
घूम कर फिर वहीं आकर बताती हैं,
तब कहाँ थे तुम, अब कहाँ हो,
अब तय करो के जाना किधर है,
मेरा तुम्हारा साथ ज्यादा नही,
थमना है तुम्हें एक दिन,
मै कब थमा हूँ किसी के लिए,
बेवफा कहो, या दर्द की दवा,
मुझे परवाह नही,
सफर में हूँ मै, मेरी कोई मंजिल नही।
अपर्णा
Awsome lines frnd :)
ReplyDeleteMam u write amazingly beautiful.
ReplyDelete