Tuesday, January 31, 2017

दर्द को जब तन्हा रात मिल जाए ,
आँखों को अधूरा ख़्वाब याद आये,
बारसात होना लाज़मी है.

 अपर्णा 

Saturday, November 7, 2015

चुगलियां

दर्द अपना आंसुओं की स्याही से कागजों को बता देना ऐ दिल.
औरों के कान जुबानों से चुगलियां लगा दिया करते हैं।

अपर्णा

Thursday, September 24, 2015

पाना है तुम्हें,
तुम्हें तुमसे छीनकर नहीं,
पाना हो मुझे,
बेझिझक आना,इंतजार में हूँ।
अपर्णा

Monday, July 13, 2015

अच्छा बुरा

अच्छा-बुरा क्या है?
कोई मेरा है,
मेरे जैसा है,
अच्छा है,
वरना,
जमाना बुरा है।
अपर्णा

Monday, June 29, 2015

Love

मोहब्बत,
मिल जाए तो जिंदगी,
ना मिले तो जिंदा मौत।
अपर्णा

Saturday, May 9, 2015

वक्त

वक्त आगे बढ़ता पल- पल,
तारीखें, घङी की सुईयों की तरह,
घूम कर फिर वहीं आकर बताती हैं,
तब कहाँ थे तुम, अब कहाँ हो,
अब तय करो के जाना किधर है,
मेरा तुम्हारा साथ ज्यादा नही,
थमना है तुम्हें एक दिन,
मै कब थमा हूँ किसी के लिए,
बेवफा कहो, या दर्द की दवा,
मुझे परवाह नही,
सफर में हूँ मै, मेरी कोई मंजिल नही।
अपर्णा

Wednesday, May 6, 2015

परछाई

कुछ कम रोशनी में वो परछाईं सताती है,मैने घर में अंधेरा कर लिया।
ना कोई आ सके, ना मै जा सकूँ, मैने किवाङ बंद कर लिया।
ना धरती आकाश से मिली कभी, ना पाषाण पानी में घुला, खुद को समझा लिया।
मिला गर सूरज भी चन्द्रमा से ग्रहण उसे लगा गया।
रोशनी से अब मुहब्बत ना रही. धूप छाँव का खेल मुझे डराने लगा।
अपने हिस्से का उजाला भी औरों के नाम कर खुद को गुमनाम कर लिया।
अपर्णा

भ्रम

झूठे भ्रम हम नही पालते मशरूफ जमाने में,
हिचकियां बंद करते हैं एक गिलास पानी में।
अपर्णा

बीता वक्त

बीते वक्त की बङी बातें अब छोटी लगती हैं,
छूटे साथ की छोटी बातें अब बङी लगती हैं।
अपर्णा

कोशिश

कोशिशें तमाम,
होती हैं नाकाम,
हर शाम,
भूलने को एक नाम।
अपर्णा

पैगाम

सुबह की ठंडी हवा ने कानों से यूँ जुल्फ हटायी,
जैसे किसी का पैगाम सुनाया हो चुपके से।
अपर्णा

अमीर गरीब

बीमार माँ को देखने विदेश से लायक बेटा दवाएँ और फल लाया,
और गरीब बेटा तीमार दारी में दिन रात लगा रहा।
अपर्णा

धूल

धूल नही जमती उन यादों में,
कि हर रोज वो किताबें हम पढ़ते हैं।
अपर्णा

पुराना

घर की सफाई करते- करते- करते,
रिश्तों के कुछ टुकङे मिले, जो प्यार से थे कभी जुङे हुए,
टुकड़ों को तो फेंक दिया, प्यार नही था बाकी अब।
और इक डिब्बे में,  माँ की चूङियां मिली,
जो याद दिला गई खनकते थप्पङ की,
दुलार था जिसमें बाकी अब तक,
फिर रख दिया संभालकय, यही तो है उनकी निशानी अब।
अपर्णा

आँसू

यूँ तो ठहरा सा है समुन्दर तेरी यादों का इन आँखों में,
डुबकी लगे जब भी, कुछ बूँदें साहिलों को भिगोकर चली जाती हैं।
अपर्णा

खामोशी

जो कहना था कह दिया, अब मेरी खामोशी सुनना।
अपर्णा

ख्वाब

ख्वाब कैसे आए हमें रातों में,
कौन जाने आते होंगे हम कितने ख्वाबों में।
अपर्णा

एहसास

एहसास. .....
उमङते- घुमङते,
डूबते- तैरते,
गोते लगाते,
छितरे- बिखरे,
दबे- कुचले,
रंगीन- उदासीन,
समेटकर सारे,
चल पङे हैं हम,
और चलेंगे निरंतर,
अंतिम साँस तक,
तुम हो इन्ही एहसासों में,
और चलोगे साथ निरंतर,
अंतिम साँस तक।
अपर्णा

सख्ती

वक्त से जरा सख्ती से क्या पेश आए हम,
वो खुद- ब- खुद नरम पङ गया।
अपर्णा

चांद तारें

इन चाँद तारों से क्या करूँ हाल-ए-दिल बयां,
कि तेरे आंगन में भी, इनका आना जाना है।
अपर्णा