इस तपती गर्मी में रोंगटे खड़े हो गए, जब देवभूमि को गिरते देखा।
मंदाकिनी को जटाओं में बसाने वाले महादेव को, उसमे ही बहते देखा।
मंदिर को शमशान में बदलते देखा, साधुओं को लुटेरे बनते देखा।
बड़ी बड़ी इमारतों को रेत के घरोंदो सा मिटते देखा।
भीगे तन लिए कांपते लोगों को प्यास से तड़पते देखा,
अपनों के हाथों से हाथ छूटते देखा, परिवारों को बिछड़ते देखा।
लाशों में कोई अपना न मिले, मन ही मन दुआ करते देखा।
इस तपती गर्मी में रोंगटे खड़े हो गए, जब देवभूमि को गिरते देखा।
अपर्णा।।
मंदाकिनी को जटाओं में बसाने वाले महादेव को, उसमे ही बहते देखा।
मंदिर को शमशान में बदलते देखा, साधुओं को लुटेरे बनते देखा।
बड़ी बड़ी इमारतों को रेत के घरोंदो सा मिटते देखा।
भीगे तन लिए कांपते लोगों को प्यास से तड़पते देखा,
अपनों के हाथों से हाथ छूटते देखा, परिवारों को बिछड़ते देखा।
लाशों में कोई अपना न मिले, मन ही मन दुआ करते देखा।
इस तपती गर्मी में रोंगटे खड़े हो गए, जब देवभूमि को गिरते देखा।
अपर्णा।।
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