Saturday, June 15, 2013

यादें 3

गिरता हूँ, संभलता हूँ, हर कदम तेरी यादों में चलता हूँ।
मायूस होता हूँ कभी , कभी मुस्कुराता भी हूँ।
उदासीन सी ज़िन्दगी में तेरे ही रंग  भरता हूँ।
आसमानों में उड़ता हूँ कभी, समुन्दर की गहराइयों में डूबता भी हूँ।
खोकर तुझे असल में, ख्यालों में पाता भी हूँ।
तेरी ही यादों में कभी मरता हूँ, कभी जीता हूँ।।
अपर्णा।।

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