महंगाई का मेहमान
पात्र तकियाकलाम
पाण्डेय जी तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी(पाण्डेय जी की पत्नी) गैस ख़त्म हो गई है।
सुब्बू(पाण्डेय जी का बेटा) छोला भटूरा खाना है।
शुक्ला जी पेट्रोल महंगा है।
नीता जी (शुक्ला जी की पत्नी) पानी चला गया है।
चिंटू (शुक्ला जी का बेटा) चप्पल टूटी है।
चिंकी (शुक्ला जी की बेटी ) खुशबू आ रही है।
पहला दृष्य :-
पाण्डेय जी (अखबार पढ़ते हुए ):- अजी सुनती हो जरा चाय पिला दो , जब तक चाय ना पियो प्रेशर नहीं बनता ,तनख्वाह नहीं मिली।
सरिता जी:- एक्सरसाइज करके प्रेशर बना लो बार -२ चाय नहीं बनेगी , गैस ख़त्म हो गई।
पाण्डेय जी :- लो भईया अब सुनो पहले दो चार बार चाय मिल जाती थी अब कसरत करनी पड़ेगी तनख्वाह नहीं मिली।
सुब्बू:- मम्मी -२ आज लंच में क्या दोगी , छोला भटूरा खाना है।
सरिता जी:- बेटा हलवा पूरी बनाई है , गैस ख़त्म हो गई है
सुब्बू :- wow मम्मी आज तो मज़ा आ जाएगी , छोला भटूरा खाना है।
सरिता जी:- अजी सुनते हो ,आज शाम का कोई कार्ड है ना ,वो मिश्रा जी की बेटी की शादी है ना आज ? गैस ख़त्म हो गई है ।
पाण्डेय जी - हाँ भाग्यवान है तो, व्यवहार भी देना पड़ेगा, तनख्वाह नहीं मिली है ।
सरिता जी:- अजी हम सब चलेंगे ना, ५०० रुपैये व्यवहार देंगे, और ५००/- प्लेट खाना हम तीनो खायेंगे, राशन और गैस बचेगी, ऊपर से , गैस ख़त्म हो गई है ।
पाण्डेय जी - वाह मेरी accountant क्या बजट बनाया है, तनख्वाह नहीं मिली है।
सुब्बू- wow पापा मतलब आज रात छोला भटूरा खाने को मिलेगा, कोल्ड ड्रिंक, ice cream, रसगुल्ला yummi .............. छोला भटूरा खाना है।
पाण्डेय जी - अरे बेटा छोला भटूरा क्या, आज तो पनीर, पुलाव, मशरूम, दही बड़ा, छप्पन भोग होगा, आखिर मिश्र जी की बेटी की शादी है, रेलवे में गार्ड हैं वो आखिर, तनख्वाह नहीं मिली है।
दूसरा दृष्य :-
(शाम को पाण्डेय जी ऑफिस से घर आ चुके हैं, मिश्रा जी के यहाँ जाने की तैयारी चल रही है, तभी दरवाजे की घंटी बजती है।)
सरिता जी:- अजी देखिये अब कौन आ टपका, गैस ख़त्म हो गई है।
पाण्डेय जी- देखता हु, पता नहीं कहीं प्लान कैंसिल ना हो जाए, तनख्वाह नहीं मिली है।
( दरवाजा खोलते ही)
शुक्ला जी पुरे परिवार के साथ अंदर आते हैं।
शुक्ला जी- नमस्कार पांडे जी, अरे कहाँ की तैयारी की जा रही है, पेट्रोल महंगा है। हम आ रहे हैं, और आप जा रहे हैं, पेट्रोल महंगा है।
पाण्डेय जी- अरे ऐसी बात नहीं है, हम लोग तो शादी में जा रहे हैं, पड़ोस में है, आप कैसे आये????? तनख्वाह नहीं मिली है।
शुक्ला जी- अरे पाण्डेय जी, वही तो आजकल शादियों का मौसम है, इनकी बहन( अपनी पत्नी की तरफ इशारा करते हुए) के घर में शादी है सीतापुर में, अब इलाहबाद से सीतापुर की सीधी ट्रेन तो है नहीं, बस से जा नहीं सकते, पेट्रोल मंहगा है। अब इस वक़्त कोई ट्रेन है नहीं, सुबह ६ बजे की है तो सोचा, पाण्डेय जी के लखनऊ में होते हुए, होटल में रुके, अच्छा नहीं लगता, पेट्रोल महंगा है
पाण्डेय जी- अरे जरुर-२ स्वागत है आपका, जैसा भी स्वागत कर पाए, तनख्वाह नहीं मिली है।
आइये भाभी जी, अरे बच्चों आओ-२ अंदर आओ।
चिंटू- जी अंकल नमस्ते आ रहे हैं, चप्पल टूटी है।
सुब्बू- पापा ये कौन हैं, छोला भटूरा खाना है।
चिंकी- मै चिंकी, ये चिंटू, खुशबू आ रही है।
पाण्डेय जी- अरे भाभी जी आप क्या सोच रही हैं? आइये आइये अंदर आइये।
नीता जी- जी भाईसाहब नमस्ते, बहुत थक गए हैं, हाथ मुह धोना था, पानी चला गया है।
पाण्डेय जी- जी जरुर और यहाँ पानी आ रहा है, टंकी भरी है। अजी सुनती हो, देखो शुक्ल जी, आये हैं पुरे परिवार के साथ, तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी- जी आई।
पाण्डेय जी- जरा भाभी जी को वाशरूम बता दो और, चाय नाश्ता सबके लिए!!!!! तनख्वाह नहीं मिली है।
( मेहमानों से मिलकर सरिता जी )
सरिता जी- नमस्ते भाईसाहब, नमस्ते भाभी जी। जी अभी बनाती हूँ
गैस ख़त्म हो गई है।
शुक्ल जी- अरे भाभी जी आप ज्यादा परेशान न होइये, बाहर से कुछ मंगवा लिजियेगा, पेट्रोल मंहगा है। बस आपके घर आते वक़्त अभी गली में गरम-२ जलेबियाँ बन रही थी। सुब्बू को भेजकर मंगवा लीजिये पेट्रोल मंहगा है। कहाँ कुछ बनाएंगी नाश्ते में, थक गई होंगी।
सरिता जी- अरे नहीं भाई साहब ऐसा नहीं है।
चिंकी- तो आंटी हलवा भी बना दीजिये, सुब्बू बता रहा था, आज सुबह आपने हलवा बनाया था, बहुत टेस्टी था, खुशबू आ रही है।
नीता जी- चुप कर चिंकी, कितनी बार कहा है, कहीं जाकर ऐसी फरमाइश नहीं करनी चाहिए, पानी चला गया है।
पाण्डेय जी- अरे भाभी जी, बच्चे हैं डांट क्यों रहे हैं, बच्चे नहीं करेंगे तो क्या हम फरमाइश करेंगे। लो बेटा सुब्बू १०० रुपैये १० समोसे ले आओ, तनख्वाह नहीं मिली है।
(सब नाश्ता करते हैं, बारी आती है खाने की तैयारी की।
उधर पाण्डेय जी से सरिता जी अकेले में कुछ कह रही हैं)
सरिता जी- अजी आज क्या-२ सोचा था खायेंगे और आराम भी मिलेगा, खाना भी नहीं बनाना पड़ेगा, पर इतने लोगो का खाना समझ रहे हैं??? गैस ख़तम हो गई है।
पाण्डेय जी- अरे जी १५ साल पहले जब हम इलाहाबाद में थे तब हमारी शादी नहीं हुई थी, शुक्ल जी के घर में अक्सर खाना होता था। शुक्ला जी की माँ बिलकुल बेटे की तरह मानती थी, फ़र्ज़ तो बनता है, मौका मिला है, क़र्ज़ उतारने क. तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी- पर १ साल पहले और अब में बहुत फर्क है, पहले -"अतिथि देवो भवः" होता था। अब "अतिथि मेंह्गो भवः" होता है, पहले जितनी रोटियां गाय को खिलाते थे, आज उतनी परिवार क लिए गिन के बनायीं जाती हैं। गैस ख़तम हो गई।
पाण्डेय जी- चलो ठीक है, अब उस वक़्त मै उनका मेहमान था, सिर्फ आज रात की ही तो बात है, क़र्ज़ उतार दो। तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी- ठीक है मरती क्या ना करती, बनाती हूँ खाना , गैस ख़त्म हो गई है।
(तभी शुक्ल जी आवाज़ देते हैं )
शुक्ला जी- आरे पाण्डेय जी कल सुबह के बाद आराम से बाते करियेगा भाभी जी से, पेट्रोल मंहगा है।। (मुस्कुराते हुए :-))
पाण्डेय जी- अरे आया भाई।
शुक्ला जी- अरे भाभी जी खाना क्या बना रही हैं? ज्यादा परेशान न होइएगा कुछ हल्का फुल्का ही बना लिजियेगा, वैसे आपके हाथों क कोफ्ते की तारीफ़ बहुत सुनी है। पेट्रोल मंहगा है।
सुब्बू- हाँ अंकल बहुत अच्छा।
चिंकी- wow पापा मुझे तो अभी से खुशबु आ रही है।
नीता जी- चुप कर चिंकी, पानी चला गया है।
(और सरिता जी से कहती हैं) अरे भाभी जी, आपको कितना काम पद रहा है हमारी वजह से, मई हाथ बतवा लेती आपका पर सफ़र से थक गयी हु बहुत( सर दबाते हुए अपना ) पानी चला गया है।
सरिता जी- अरे ऐसा नहीं है भाभी जी, मै कर लुंगी अकेले, आप आराम करिये. गैस ख़तम हो गई है।
नीता जी- और भाभी जी, इन्हें ना सलाद में मूली के साथ प्याज टमाटर भी चाहिए होता है, और आम का अच्चार भरे मिर्च हो तो और अच्छा, और मीठे में तो कुछ रखा ही होगा, खाने क बाद इन्हें मीठा जरुर चाहिए।
सरिता जी -जी जरुर (और सोचते हुए इतना सब बनाओ, फिर सुबह बाई ज्यादा बर्तन देखेगी तो चिल्लाएगी, कहीं छोड़ के ना चली जाए,)
( रात को ११:३० पे सब खाना खाते हैं, खाना खाकर सब बैठे हैं )
शुक्ल जी- भाभी जी कल सुबह ६ बजे हमारी ट्रेन केसरबाग़ से सीतापुर क लिए है, लेट- लपेट तो हो ही जाती है, पता नहीं कितने बजे पहुंचे, आप ऐसा करिए ज्यादा नहीं, आलू फ्राई कर दीजियेगा और पूड़ी बना दीजियेगा हम ५ :३० पे घर से निकलेंगे। और पाण्डेय जी सुबह ऑटो तो मिलेगा नहीं, हम तो थक गए हैं, आप अभी जाके ऑटो बुक करा देंगे???? पेट्रोल मंहगा है।
पाण्डेय जी- जी हाँ अभी तो टैक्सी स्टैंड में ऑटो मिल जायेंगे, करवा देते हैं, तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी सोचते हुए (अब उफ़ अब सुबह की भी तैयारी, गैस ख़तम हो गई है )
पाण्डेय जी सोचते हुए( अब ऑटो भी बुक कराएँ तनख्वाह नहीं मिली है )
(उधर चिंकी को सुब्बू का पसंदीदा खिलौना पसंद आ जाता है, वो उसे पाण्डेय जी से कह के मांग लेती है। और सुब्बू दुखी हो जाता है )
सुबह ऑटो में मेहमानों को विदा करते हुए पाण्डेय परिवार के चेहरे पे चमक रहती है के अंततः जा रहे हैं मंहगाई क मेहमान :-) ये सोचते हुए के चलो अब नहीं आयेंगे- मंहगाई क मेहमान। क्यूकि आजकल के ज़माने में अतिथि मेन्ह्गो भवः।
पाण्डेय जी- नमस्कार भाभी जी,. शुक्ल जी फिर मिलते हैं अब जब इलाहाबाद आयेंगे तो। तनख्वाह नहीं मिली।
शुक्ल जी - अरे जरुर पर उससे पहले लखनऊ में ही मिलेंगे, वापसी में फिर यहीं आयेंगे और अभी हमें पूरा लखनऊ देखना है। आप घुमाने क लिए तैयार रहिएगा। पेट्रोल मंहगा है। और तब तक आपकी तनख्वाह भी मिल जाएगी हा हा हा हा हंसते हुए।
और ऑटो चला जाता है, पाण्डेय परिवार हाथ हिलाते हुए एक दुसरे को तरस की नज़र से देखते हैं। :-)
द्वारा - अपर्णा
पात्र तकियाकलाम
पाण्डेय जी तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी(पाण्डेय जी की पत्नी) गैस ख़त्म हो गई है।
सुब्बू(पाण्डेय जी का बेटा) छोला भटूरा खाना है।
शुक्ला जी पेट्रोल महंगा है।
नीता जी (शुक्ला जी की पत्नी) पानी चला गया है।
चिंटू (शुक्ला जी का बेटा) चप्पल टूटी है।
चिंकी (शुक्ला जी की बेटी ) खुशबू आ रही है।
पहला दृष्य :-
पाण्डेय जी (अखबार पढ़ते हुए ):- अजी सुनती हो जरा चाय पिला दो , जब तक चाय ना पियो प्रेशर नहीं बनता ,तनख्वाह नहीं मिली।
सरिता जी:- एक्सरसाइज करके प्रेशर बना लो बार -२ चाय नहीं बनेगी , गैस ख़त्म हो गई।
पाण्डेय जी :- लो भईया अब सुनो पहले दो चार बार चाय मिल जाती थी अब कसरत करनी पड़ेगी तनख्वाह नहीं मिली।
सुब्बू:- मम्मी -२ आज लंच में क्या दोगी , छोला भटूरा खाना है।
सरिता जी:- बेटा हलवा पूरी बनाई है , गैस ख़त्म हो गई है
सुब्बू :- wow मम्मी आज तो मज़ा आ जाएगी , छोला भटूरा खाना है।
सरिता जी:- अजी सुनते हो ,आज शाम का कोई कार्ड है ना ,वो मिश्रा जी की बेटी की शादी है ना आज ? गैस ख़त्म हो गई है ।
पाण्डेय जी - हाँ भाग्यवान है तो, व्यवहार भी देना पड़ेगा, तनख्वाह नहीं मिली है ।
सरिता जी:- अजी हम सब चलेंगे ना, ५०० रुपैये व्यवहार देंगे, और ५००/- प्लेट खाना हम तीनो खायेंगे, राशन और गैस बचेगी, ऊपर से , गैस ख़त्म हो गई है ।
पाण्डेय जी - वाह मेरी accountant क्या बजट बनाया है, तनख्वाह नहीं मिली है।
सुब्बू- wow पापा मतलब आज रात छोला भटूरा खाने को मिलेगा, कोल्ड ड्रिंक, ice cream, रसगुल्ला yummi .............. छोला भटूरा खाना है।
पाण्डेय जी - अरे बेटा छोला भटूरा क्या, आज तो पनीर, पुलाव, मशरूम, दही बड़ा, छप्पन भोग होगा, आखिर मिश्र जी की बेटी की शादी है, रेलवे में गार्ड हैं वो आखिर, तनख्वाह नहीं मिली है।
दूसरा दृष्य :-
(शाम को पाण्डेय जी ऑफिस से घर आ चुके हैं, मिश्रा जी के यहाँ जाने की तैयारी चल रही है, तभी दरवाजे की घंटी बजती है।)
सरिता जी:- अजी देखिये अब कौन आ टपका, गैस ख़त्म हो गई है।
पाण्डेय जी- देखता हु, पता नहीं कहीं प्लान कैंसिल ना हो जाए, तनख्वाह नहीं मिली है।
( दरवाजा खोलते ही)
शुक्ला जी पुरे परिवार के साथ अंदर आते हैं।
शुक्ला जी- नमस्कार पांडे जी, अरे कहाँ की तैयारी की जा रही है, पेट्रोल महंगा है। हम आ रहे हैं, और आप जा रहे हैं, पेट्रोल महंगा है।
पाण्डेय जी- अरे ऐसी बात नहीं है, हम लोग तो शादी में जा रहे हैं, पड़ोस में है, आप कैसे आये????? तनख्वाह नहीं मिली है।
शुक्ला जी- अरे पाण्डेय जी, वही तो आजकल शादियों का मौसम है, इनकी बहन( अपनी पत्नी की तरफ इशारा करते हुए) के घर में शादी है सीतापुर में, अब इलाहबाद से सीतापुर की सीधी ट्रेन तो है नहीं, बस से जा नहीं सकते, पेट्रोल मंहगा है। अब इस वक़्त कोई ट्रेन है नहीं, सुबह ६ बजे की है तो सोचा, पाण्डेय जी के लखनऊ में होते हुए, होटल में रुके, अच्छा नहीं लगता, पेट्रोल महंगा है
पाण्डेय जी- अरे जरुर-२ स्वागत है आपका, जैसा भी स्वागत कर पाए, तनख्वाह नहीं मिली है।
आइये भाभी जी, अरे बच्चों आओ-२ अंदर आओ।
चिंटू- जी अंकल नमस्ते आ रहे हैं, चप्पल टूटी है।
सुब्बू- पापा ये कौन हैं, छोला भटूरा खाना है।
चिंकी- मै चिंकी, ये चिंटू, खुशबू आ रही है।
पाण्डेय जी- अरे भाभी जी आप क्या सोच रही हैं? आइये आइये अंदर आइये।
नीता जी- जी भाईसाहब नमस्ते, बहुत थक गए हैं, हाथ मुह धोना था, पानी चला गया है।
पाण्डेय जी- जी जरुर और यहाँ पानी आ रहा है, टंकी भरी है। अजी सुनती हो, देखो शुक्ल जी, आये हैं पुरे परिवार के साथ, तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी- जी आई।
पाण्डेय जी- जरा भाभी जी को वाशरूम बता दो और, चाय नाश्ता सबके लिए!!!!! तनख्वाह नहीं मिली है।
( मेहमानों से मिलकर सरिता जी )
सरिता जी- नमस्ते भाईसाहब, नमस्ते भाभी जी। जी अभी बनाती हूँ
गैस ख़त्म हो गई है।
शुक्ल जी- अरे भाभी जी आप ज्यादा परेशान न होइये, बाहर से कुछ मंगवा लिजियेगा, पेट्रोल मंहगा है। बस आपके घर आते वक़्त अभी गली में गरम-२ जलेबियाँ बन रही थी। सुब्बू को भेजकर मंगवा लीजिये पेट्रोल मंहगा है। कहाँ कुछ बनाएंगी नाश्ते में, थक गई होंगी।
सरिता जी- अरे नहीं भाई साहब ऐसा नहीं है।
चिंकी- तो आंटी हलवा भी बना दीजिये, सुब्बू बता रहा था, आज सुबह आपने हलवा बनाया था, बहुत टेस्टी था, खुशबू आ रही है।
नीता जी- चुप कर चिंकी, कितनी बार कहा है, कहीं जाकर ऐसी फरमाइश नहीं करनी चाहिए, पानी चला गया है।
पाण्डेय जी- अरे भाभी जी, बच्चे हैं डांट क्यों रहे हैं, बच्चे नहीं करेंगे तो क्या हम फरमाइश करेंगे। लो बेटा सुब्बू १०० रुपैये १० समोसे ले आओ, तनख्वाह नहीं मिली है।
(सब नाश्ता करते हैं, बारी आती है खाने की तैयारी की।
उधर पाण्डेय जी से सरिता जी अकेले में कुछ कह रही हैं)
सरिता जी- अजी आज क्या-२ सोचा था खायेंगे और आराम भी मिलेगा, खाना भी नहीं बनाना पड़ेगा, पर इतने लोगो का खाना समझ रहे हैं??? गैस ख़तम हो गई है।
पाण्डेय जी- अरे जी १५ साल पहले जब हम इलाहाबाद में थे तब हमारी शादी नहीं हुई थी, शुक्ल जी के घर में अक्सर खाना होता था। शुक्ला जी की माँ बिलकुल बेटे की तरह मानती थी, फ़र्ज़ तो बनता है, मौका मिला है, क़र्ज़ उतारने क. तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी- पर १ साल पहले और अब में बहुत फर्क है, पहले -"अतिथि देवो भवः" होता था। अब "अतिथि मेंह्गो भवः" होता है, पहले जितनी रोटियां गाय को खिलाते थे, आज उतनी परिवार क लिए गिन के बनायीं जाती हैं। गैस ख़तम हो गई।
पाण्डेय जी- चलो ठीक है, अब उस वक़्त मै उनका मेहमान था, सिर्फ आज रात की ही तो बात है, क़र्ज़ उतार दो। तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी- ठीक है मरती क्या ना करती, बनाती हूँ खाना , गैस ख़त्म हो गई है।
(तभी शुक्ल जी आवाज़ देते हैं )
शुक्ला जी- आरे पाण्डेय जी कल सुबह के बाद आराम से बाते करियेगा भाभी जी से, पेट्रोल मंहगा है।। (मुस्कुराते हुए :-))
पाण्डेय जी- अरे आया भाई।
शुक्ला जी- अरे भाभी जी खाना क्या बना रही हैं? ज्यादा परेशान न होइएगा कुछ हल्का फुल्का ही बना लिजियेगा, वैसे आपके हाथों क कोफ्ते की तारीफ़ बहुत सुनी है। पेट्रोल मंहगा है।
सुब्बू- हाँ अंकल बहुत अच्छा।
चिंकी- wow पापा मुझे तो अभी से खुशबु आ रही है।
नीता जी- चुप कर चिंकी, पानी चला गया है।
(और सरिता जी से कहती हैं) अरे भाभी जी, आपको कितना काम पद रहा है हमारी वजह से, मई हाथ बतवा लेती आपका पर सफ़र से थक गयी हु बहुत( सर दबाते हुए अपना ) पानी चला गया है।
सरिता जी- अरे ऐसा नहीं है भाभी जी, मै कर लुंगी अकेले, आप आराम करिये. गैस ख़तम हो गई है।
नीता जी- और भाभी जी, इन्हें ना सलाद में मूली के साथ प्याज टमाटर भी चाहिए होता है, और आम का अच्चार भरे मिर्च हो तो और अच्छा, और मीठे में तो कुछ रखा ही होगा, खाने क बाद इन्हें मीठा जरुर चाहिए।
सरिता जी -जी जरुर (और सोचते हुए इतना सब बनाओ, फिर सुबह बाई ज्यादा बर्तन देखेगी तो चिल्लाएगी, कहीं छोड़ के ना चली जाए,)
( रात को ११:३० पे सब खाना खाते हैं, खाना खाकर सब बैठे हैं )
शुक्ल जी- भाभी जी कल सुबह ६ बजे हमारी ट्रेन केसरबाग़ से सीतापुर क लिए है, लेट- लपेट तो हो ही जाती है, पता नहीं कितने बजे पहुंचे, आप ऐसा करिए ज्यादा नहीं, आलू फ्राई कर दीजियेगा और पूड़ी बना दीजियेगा हम ५ :३० पे घर से निकलेंगे। और पाण्डेय जी सुबह ऑटो तो मिलेगा नहीं, हम तो थक गए हैं, आप अभी जाके ऑटो बुक करा देंगे???? पेट्रोल मंहगा है।
पाण्डेय जी- जी हाँ अभी तो टैक्सी स्टैंड में ऑटो मिल जायेंगे, करवा देते हैं, तनख्वाह नहीं मिली है।
सरिता जी सोचते हुए (अब उफ़ अब सुबह की भी तैयारी, गैस ख़तम हो गई है )
पाण्डेय जी सोचते हुए( अब ऑटो भी बुक कराएँ तनख्वाह नहीं मिली है )
(उधर चिंकी को सुब्बू का पसंदीदा खिलौना पसंद आ जाता है, वो उसे पाण्डेय जी से कह के मांग लेती है। और सुब्बू दुखी हो जाता है )
सुबह ऑटो में मेहमानों को विदा करते हुए पाण्डेय परिवार के चेहरे पे चमक रहती है के अंततः जा रहे हैं मंहगाई क मेहमान :-) ये सोचते हुए के चलो अब नहीं आयेंगे- मंहगाई क मेहमान। क्यूकि आजकल के ज़माने में अतिथि मेन्ह्गो भवः।
पाण्डेय जी- नमस्कार भाभी जी,. शुक्ल जी फिर मिलते हैं अब जब इलाहाबाद आयेंगे तो। तनख्वाह नहीं मिली।
शुक्ल जी - अरे जरुर पर उससे पहले लखनऊ में ही मिलेंगे, वापसी में फिर यहीं आयेंगे और अभी हमें पूरा लखनऊ देखना है। आप घुमाने क लिए तैयार रहिएगा। पेट्रोल मंहगा है। और तब तक आपकी तनख्वाह भी मिल जाएगी हा हा हा हा हंसते हुए।
और ऑटो चला जाता है, पाण्डेय परिवार हाथ हिलाते हुए एक दुसरे को तरस की नज़र से देखते हैं। :-)
द्वारा - अपर्णा
मर्म स्पर्शी लेखन ! कहानी के पात्र बन्धे हुये हैं ... पांडे और सारिता जी की वार्ता बहुत ही व्यावहारिक लग रही है !
ReplyDeleteकहानी क्रम भी बहुत बंधा हुआ है !
शुभकामनाओ के साथ
सादर !
अनुराग त्रिवेदी -एहसास
thank you bhaiya padhne k liye aur pasand karne k liye
Deletenice story........
ReplyDeletethanks my sona :-)
Deleteहा हा हा ...अतिथि मंह्गो भव:
ReplyDeleteमजा आ गया ....
mera likhna safal ho gaya shikha ji!!!
Deletebahut bahut dhanywaad :-)
Bahut badhiyaaaa ....
ReplyDeleteshukriya Lekh ji
ReplyDelete