Wednesday, March 6, 2013

ऐ खुदा

ऐ  खुदा मुझे इन यादों के घने जंगल से निकाल, भूलने की आदत दे दे।

दर्द दे कर भूल गया तू, ख़ैर  इतना कर, दिल से आँखों का रास्ता बंद कर दे।
आंसुओं का समुन्दर, जो है समाया  मुझमे, उसे सोखने की ताकत दे दे।
ऐ  खुदा मुझे इन यादों के घने जंगल से निकाल, भूलने की आदत दे दे।।

इस दुनिया में रहकर भी, इसके ना  हुए, मेरे रवैये में भी थोड़ी सी मिलावट कर दे।
खुशियाँ ही मिले जो भी रूबरू हो, मेरे चेहरे को थोड़ी सी मुस्कराहट दे दे।
ऐ  खुदा मुझे इन यादों के घने जंगल से निकाल, भूलने की आदत दे दे।

ज़िन्दगी भर ना सही, कुछ पलों के लिए ही, मेरे दिल को थोड़ी सी फुरसत दे दे।
इल्तेज़ा है इतनी ही तुझसे , के कबूल   मेरी भी इबादत कर ले।
ऐ  खुदा मुझे इन यादों के घने जंगल से निकाल, भूलने की आदत दे दे।
-------अपर्णा-------


1 comment:

  1. मंगलवार 23/04/2012को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं ....
    आपके सुझावों का स्वागत है ....
    धन्यवाद .... !!

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