!!!!!वो भी बंटेगी आज!!!!
बैठी थी चौखट पे वो, आसमां को निहारती आज!
जिस घर में आकर पूरी हुई, वहीँ बंटेगी वो आज!
जिस आँगन में उन्हें चलना सिखाया, उस आँगन क साथ वो भी बंटेगी आज!
जिस चम्मच से उन्हें दावा पिलाई, उस चम्मच के साथ वो भी बंटेगी आज!
जिस तवे पे सेंक के उन्हें रोटियां खिलायी, उस तवे क साथ वो भी बंटेगी आज!
जिस थाली में उन्हें एक साथ खाना सिखाया, उस थाली के साथ वो भी बंटेगी आज!
जिन गहनों को गिरवी रखकर उन्हें काबिल बनाया, उनके साथ वो भी बंटेगी आज !
सोच में डूबी थी वो, जाउंगी मै किसके साथ, छोटा ले जायेगा या बड़ा रखेगा अपने पास!
हे ईश्वर बुला लो मुझे अपने पास, करती रही बस यही फ़रियाद!!!
हुआ सवेरा आई जब बंटवारे की बात, क्या बांटते वो!!!!!!!!!
बची न थी उसमे बांटने को अब एक भी सांस, एक भी सांस, एक भी सांस!!!!!!
अपर्णा!!!!!
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