कौन माँगता है साथ जिंदगी भर का,
इक लम्हा मोहब्बत का मेरे नाम कर देना,
कट जाएगी उम्र जश्न मनाने में।
अपर्णा
Wednesday, May 6, 2015
Lamha
Friday, May 1, 2015
रिश्ते
ना सात फेरों का बंधन,
ना नौ महीनों में बनती धङकन,
ना सात जन्मो की कसम,
हाथ मिला, साथ मिला, जुङ गया बंधन।
एक पहलू ये भी दोस्ती का,
सीधा, सरल, सस्ता, उपलब्ध रिश्ता दोस्ती।
अकेलापन दूर करने का उपाय दोस्ती ।
बिन बातों की बात का पिटारा है दोस्ती।
एक बात से सहमत और हो गयी दोस्ती।
दिल टूटा तो रोने का कांधा है दोस्ती।
उदासियों में खिलखिलाहट भर दे वो रिश्ता है दोस्ती।
सारे जहाँ से जो लङ ले खातिर तेरे वो है दोस्ती।
बेवकूफियों पे डांट लगाए वो ही है दोस्तीदोस्ती।
पर कभी कभी कुछ ऐसा भी होता है-
ना बनी तो खत्म, कौन सा खून का रिश्ता है दोस्ती।
खून के रिश्ते का रंग लाल, किस रंग की है दोस्ती।
जमाने में रिश्ते पूछे जाते हैं, ना कि दोस्तीदोस्ती।
इक अदना सा शब्द है बस दोस्तीदोस्ती।
जिस रिश्ते को नाम ना दे सको, कह दो है दोस्ती।
फिर दामन छुङाना हो तो, रख लो एक लम्बी सी चुप्पी।
हाँ मगर मैने ये जाना है और माना है,
गर प्यार से बढ़कर नही तो कम भी नही है दोस्ती।
अपर्णा
Thursday, April 23, 2015
दोस्ती
ना सात फेरों का बंधन,
ना नौ महीने में बनती धङकन,
ना सात जन्मों की कसम,
हाथ मिला, साथ मिला और जुङ गया बंधन।
एक पहलू येभी
मां
जी नही सकते तेरे बगैर,
जी रहे हैं फिर भी खैर,
तेरी बातों, यादों, एहसासों को समेटकर, प्यारी अम्मा।
अपर्णा